*जंगल-जंगल बाग चली है, पता चला है !!! वन विभाग सैलानियों को दिखाएगा जंगल… पढ़े पुरी खबर #kangralive*
July 8th, 2017 | 88 Views

वन विभाग का ईको टूरिज़म पर ज़ोर सैलानियों को दिखाएगा जंगल ‼️पढ़ाएगा पर्यावरण का पाठ!!! 

विशाल सूद (शिमला): सैलानियों को प्राकृति से रूबरू करवाने के लिए वन विभाग ने पहल कर दी है। इतना ही नहीं वन विभाग अब सैलानियों को प्रकृति के बीच भी ले जाएगा। यानी, सैलानी अब जंगलों के बीच जाकर भी प्रकृति को और करीब से निहार पाएंगे। इससे न केवल वे ज्यादा दिन यहां घूम पाएंगे, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी जागरूक होंगे। इसी दिशा में वन विभाग भी कार्य कर रहा है और वह ईको टूरिज्म के माध्यम से सैलानियों के नेचर के और करीब ले जा रहा है।
ईको टूरिज्म को और आगे किस तरह से विकसित किया जाए और कैसे इसमें निवेश बढ़ाकर निजी सहभागिता को जोड़ा जाए, इसे लेकर आज यहां एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में ईको टूरिज्म को और बढ़ावा देने को कैसे कार्य किया जाए, इस पर मंथन हो रहा है। इसमें चर्चा हो रही है कि कैसे ईको टूरिज्म को और बढ़ाया जा सकता है और इसमें निवेशकों को कैसे आकर्षित किया जा सकता है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) तरूण कपूर ने इस कार्यशाला में कहा कि सैलानियों का हिमाचल में ज्यादा से ज्यादा ठहराव बढ़ाने में ईको टूरिज्म का अहम रोल है। ईको टूरिज्म से जहां सैलानियों को ठहराव बढ़ेगा, वहीं सैलानियों को प्रकृति के नजदीक भी लाया जा सकेगा। इसके साथ-साथ उन्हें नेचर के प्रति भी जागरूक किया जा सकेगा। उनका कहना था कि राज्य में करीब 70 फीसदी वन क्षेत्र है और इसमें सैलानियों को कैसे लाना है और नेचर को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे पर्यटन को बढ़ाना है, इस पर आज यहां मंथन हो रहा है।

कैंपिंग लगाकर ठहराए जा सकते हैं सैलानी

कपूर ने कहा कि वन संपदा को पर्यटन के लिए खोलने और सैलानियों को वहां ठहराने को लेकर कैसे कार्य किया जाना है, उस पर आज यहां चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि ईको टूरिज्म के तहत वन क्षेत्र में कोई स्थाई स्ट्रक्चर नहीं बन सकता। ऐसे में वहां अस्थाई स्ट्रक्चर से काम करना होता है और कैंपिंग लगाकर ही सैलानियों को ठहराया जा सकता है। उनका कहना था कि ईको टूरिज्म के लिए सरकार ने इसी वर्ष एक पॉलिसी भी बनाई है और इसमें कई प्रावधान किए गए हैं और बाकी मंथन के इस दौर से जो सुझाव इसकी बेहतरी के लिए आएंगे,उस पर सरकार गौर करेगी।

उधर, सीसीएफ (ईको टूरिज्म) डॉ. जीआर साहिबी ने कहा कि कार्यशाला का मकसद सैलानियों और स्थानीय लोगों को ईको टूरिज्म की जानकारी देना है। इसमें पर्यटन, वन और टूर आपरेटरों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं और इनसे ईको टूरिज्म के बारे में और विचार मंथन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में ईको टूरिज्म को लेकर नया रोड मैप तैयार किया जाएगा और इसमें आगे कैसे बढ़ना है, इस पर विचार -विमर्श किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ईको टूरिज्म में सैलानियों को न केवल प्रकृति के करीब लाया जाएगा, बल्कि उन्हें आर्गेनिक के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ-साथ उन्हें पर्यावरण की जानकारी देने के साथ-साथ वन्यप्राणियों को बचाने को लेकर भी जानकारी जाएगी।