*#GST पर मिली राहत, कारोबारी छह महीने में क्लीयर करें पुराना स्टॉक, पढ़े पुरी खबर #kangralive #shimlalive*

शिमला : जीएसटी लागू होने के साथ ही व्यापारियों को नुकसान न हो, इसलिए उन्हें छह महीने की राहत दी गई है। व्यापारी अपना स्टॉक छह महीने में क्लीयर कर पाएंगे, बशर्ते उनके पास एक साल पुराना स्टॉक न हो। एक साल की अवधि में उन्होंने जो स्टॉक भरा है, उसे ही क्लीयर करने की राहत उन्हें प्रदान की गई है। इससे पुराना स्टॉक यदि व्यापारी बेचते हैं तो उन्हें इन्कम टैक्स क्लीयरेंस का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके लिए खुद व्यापारी को अप्लाई करना होगा, जो कि छह महीने के भीतर ही होगा। इसे देखते हुए व्यापारियों ने कुछ राहत की सांस जरूर ली है। पहले व्यापारियों को यही चिंता सता रही थी कि वे पुराने स्टॉक का क्या करेंगे और उनके पास बिल बुकें भी पुरानी हैं। बताया जाता है कि ऑनलाइन एक फार्म उन्हें जीएसटी साइट से मिल जाएगा, जिसे वे अपने स्टॉक क्लीयरेंस के लिए भर पाएंगे। यह प्रक्रिया भी पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जिसके लिए व्यापारियों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। हिमाचल सरकार के आबकारी एवं कराधान विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं, जिसमें कहा गया है कि व्यापारी छह महीने तक पुराने स्टॉक को क्लीयर करें। उनके पास एक साल पुराने स्टॉक के पक्के बिल होने चाहिएं क्योंकि उनकी क्लीयरेंस पर ही उन्हें इन्कम टैक्स का लाभ मिल सकेगा। जिन लोगों के पास एक साल की अवधि वाले बिल नहीं होंगे, उनको यह लाभ नहीं मिल पाएगा, लिहाजा उन लोगों के लिए दिक्कत रहेगी।

वर्कशॉप पर हो रहा विचार
व्यापारियों को जीएसटी के बारे में विस्तार से जानकारी देने के लिए प्रदेश भर में व्यापार मंडलों के माध्यम से फिर कार्यशालाएं आयोजित करने का विचार है। क्योंकि व्यापारियों को इसकी जानकारी नहीं और जब ये कार्यशालाएं पहले की गईं तो ये लोग वहां पर नहीं पहुंचे। ऐसे में अभी शुरुआती दिक्कत इन लोगों को झेलनी ही पड़ेगी।
ये अधिकारी दूर करेंगे कारोबारियों की दिक्कत
जीएसटी पर व्यापारियों कर समस्याओं को हल करने के लिए आबकारी विभाग ने दो अधिकारियों को दायित्व सौंपा है। शिमला में अतिरिक्त आबकारी आयुक्त संजय भारद्वाज को सेवा वस्तु कर आयुक्त का जिम्मा दिया गया है, वहीं उप सेवा कर आयुक्त का दायित्व राकेश शर्मा को सौंपा गया है। इसके अलावा जिलों के सहायक आबकारी आयुक्तों, आबकारी कराधान अधिकारियों को प्रॉपर अधिकारियों की व्याख्या कर शक्तियां प्रदान कर दी गई हैं।

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